बीकानेर का जोड़बीड़ क्षेत्र बना ईस्टर्न एशिया फ्लाइवे के पक्षियों का नया ठिकाना

बीकानेर का जोड़बीड़ क्षेत्र बना ईस्टर्न एशिया फ्लाइवे के पक्षियों का नया ठिकाना

ईट करीब 4 हजार किलोमीटर दूर भारत के बीकानेर शहर में हैं। जोड़बीड़ कंजर्वेशन में सुरक्षित हैं। यहां उनके लिए प्रचूर मात्रा में भोजन है। तो उन्होंने राहत की सांस ली। बर्ड वॉचर्स इस घटना से विस्मित और उत्साहित हैं। क्योंकि यह एक नई और बड़ी खोज साबित हुई है। जी हां, ईस्टर्न एशिया फ्लाइवे के पक्षियों ने अपने लिए नया डेस्टिनेशन खोज निकाला है।

थाईलैंड से 4066 किलोमीटर लंबी उड़ान भरकर करीब 900 ब्लैक काईट यानी मिल्वस माइग्रेंस गोविंद प्रजाति के चील पहली बार एशिया के सबसे बड़े ऑपन डंपिंग यार्ड जोड़बीड़ कंजर्वेशन रिजर्व “” आईबीए साइट “” पहुंचे हैं। मध्य थाईलैंड के नाखोन नायोके प्रांत से इन्हें फरवरी 2020 में छोड़ा गया था। इसके शरीर पर सोलर प्लेट भी लगी है। थाईलैंड में बर्ड कंजर्वेशन से जुड़े चाइयान ब्लैक काईट की जीएसएम जीपीएस सिस्टम के माध्यम से सेटेलाइट से निगरानी कर रहे हैं। इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर (आईयूसीएन) के सदस्य दाऊ लाल बोहरा के सम्पर्क में हैं।

इसलिए खास... मिल्वस माइग्रेंस गोविंद प्रजाति के चील बीकानेर में भी बड़ी संख्या में हैं। लेकिन पहली बार किसी शिकारी पक्षी का थाईलैंड से राजस्थान के डेजर्ट की ओर मूवमेंट है। ईस्ट एशिया फ्लाइवे में ये रेप्टर्स चायना, म्यामांर, बांग्लादेश, थाईलैंड, ऑस्ट्रेलिया में उड़ते हैं। यह प्रजाति स्थानीय के साथ प्रवासी पक्षियों में भी सम्मिलित हो गई है। इन्होंने बांग्लादेश के रास्ते 12 जून को भारत मे प्रवेश किया था। 6 जुलाई को छिंदवाड़ा में थे और 7 सितंबर को इनके सिग्नल जोड़बीड़ में मिले। मार्च 2020 में टैगिंग किया स्टेपी ईगल भी जोड़बीड़ मिला था। वह कजाकिस्तान से आया था।

राजस्थान मध्य एशिया के रैप्टरों की मेजबानी करता है। नया पैटर्न इंगित करता है कि एक ओपन डंपिंग साइट रैप्टर्स द्वारा पसंद की जाती है।
-दाऊ लाल बोहरा, सदस्य, इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर (आईयूसीएन)
जोड़बीड़ कंजर्वेशन रिजर्व एशिया की सबसे बड़ी ऑपन डंपिंग साइट है। इस माह के अंत तक जोड़बीड़ में हजारों की संख्या में प्रवासी पक्षी पहुंच जाएंगे।