लंदन का एक दिल जो धड़कता है भरतपुर के ढाई हजार गरीब बच्चों के लिए

लंदन का एक दिल जो धड़कता है भरतपुर के ढाई हजार गरीब बच्चों के लिए

लंदन निवासी मशहूर मनोचिकित्सक डॉ. पामेला कौशल का दिल भरतपुर के गरीब बच्चों के लिए धड़कता है। वे एक वर्ष का अवकाश लेकर पिछले साल रामकृष्ण मिशन के सेवा कार्यों से जुड़ी और भारत आईं।

वृंदावन में प्रवास के दौरान उन्होंने गांवों का दौरा किया और देखा कि बच्चों की शैक्षिक और स्किल्ड एजुकेशन काफी खराब है। उन्होंने बतौर प्रयाेग केसी घाट पर बच्चों को निशुल्क ट्यूशन देना प्रारंभ किया। इसी दौरान उन्हें भरतपुर के अपना घर आश्रम का पता चला और वे निराश्रितों की मनोचिकित्सा करने के लिए भरतपुर आ गई।

तभी विचार किया कि क्यों न वृंदावन में छूट गए अधूरे सपने को भरतपुर में पूरा किया जाए। डॉ. पामेला ने विद्या ज्योति एनजीओ के नाम से सितंबर 2019 में 40 गांव चिह्नित किए जहां बौद्धिक अक्षमता और विशेष शैक्षिक आवश्यकताओं वाले बच्चों को नैतिक, शैक्षिक और कौशल विकास शिक्षा देना तय किया। उन्होंने लुपिन फाउंडेशन के सहयोग से विद्या ज्योति के नाम से 40 स्थानों पर करीब 2500 बच्चों को अनौपचारिक शिक्षा प्रारंभ करना तय किया।

शुरुआत भी हुई, लेकिन तभी फरवरी-मार्च में कोरोना आ गया। डॉ. पामेला कौशल को बीच में ही प्रोजेक्ट छोड़कर लंदन जाना पड़ा। लेकिन जाने से पहले वे टीचर्स और मैनेजमेंट का नेटवर्क खड़ा कर गई। फंडिंग वे लंदन से करती हैं। फिलहाल शहर में 4 और 11 अन्य गांवों में शैक्षिक कार्य जारी है।

इसमें भरतपुर शहर में गोकुल नगर, तूफानी मोहल्ला, हरिजन बस्ती, पटपरा मोहल्ला सहित चिकसाना, हेतमपुरा, उंदरा, इकरन, बझेरा, खेमरा, फुलवारा, सुनारी आदि गांवों में शिक्षण कार्य जारी है। यहां करीब 550 बच्चों को अध्यापन कराया जा रहा है। इसके अलावा विद्या ज्योति संस्था द्वारा स्वास्थ्य मंदिर के सहयोग से महिलाओं को सिलाई प्रशिक्षण कार्यक्रम भी चलाया जा रहा है। यहां मास्क बनाने का काम चल रहा है, जिन्हें निशुल्क वितरित किया जाएगा।

13 गांवों में 15 से कक्षाएं
डॉ. पामेला कौशल के एनजीओ विद्या ज्योति की ओर से 15 अक्टूबर से 13 गांवों में प्राथमिक कक्षाएं प्रारंभ होंगी। इसके लिए 13 अक्टूबर मंगलवार को ल्युपिन के कार्यालय में प्रशिक्षण होगा तथा अगले 15 दिनों के लिए पाठ्यक्रम और केंद्र के लिए आवश्यक अन्य सामग्री दी जाएगी।

समन्वयक मृगांक ने बताया कि 15 अक्टूबर से गांव इकरन, चिकसाना, उंदरा, भरंगरपुर, घुसियारी, नूरपुर, सुनारी, बहनेरा, बझेरा, चक दौलतपुर, चार्ली गंज, नगला बरताई और चकहथकौली में कक्षाएं प्रारंभ की जाएंगी। यहां कोरोना गाइडलाइन की पालना के साथ शिक्षण कार्य होगा।

संदेश, ज्ञान ही व्यक्ति में बदलाव और विकास ला सकता है : डॉ. पामेला कौशल
ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से मनोचिकित्सक लंदन निवासी डॉ. पामेला कौशल का मानना है कि ज्ञान ही व्यक्ति में बदलाव और विकास ला सकता है। अन्य सहायता व्यक्ति को पराधीन बना सकती हैं, लेकिन ज्ञान/शिक्षा व्यक्ति में विकास की चेतना विकसित कर सकती है। इसलिए हमारा शिक्षा विशेषकर नैतिक शिक्षा और कौशल विकास पर जोर है।

रोजगार परक कार्यक्रम भी चलाना प्रस्तावित है। कोरोना के बाद प्रशासन के साथ मिलकर बड़ा प्लान करेंगे। उल्लेखनीय है कि डॉ. पामेला कौशल की मां डॉ. सोम ज्योति कौशल मूलत: चंडीगढ़ की है। वे सन 1960 में लंदन चली गई थीं।