कार्रवाई सिर्फ दिखावा:गांवों में 15 से 50 रुपए में बिक रही अवैध शराब, ठिकाने बदले, नहीं रुका कारोबार
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कार्रवाई सिर्फ दिखावा:गांवों में 15 से 50 रुपए में बिक रही अवैध शराब, ठिकाने बदले, नहीं रुका कारोबार
भरतपुर10 घंटे पहले
रूपवास में 7 मौतों के बाद हथकढ़ शराब के कारोबार की पड़ताल करने गांवों में पहुंची भास्कर टीम
रूपवास के चक सामरी में 7 परिवारों में मातम है। करीब 4-5 लोग अभी भी अस्पताल में जिंदगी और मौत से लड़ रहे हैं। अपनी लाज बचाने के लिए पुलिस और आबकारी विभाग ने कच्ची शराब बनाने के ठिकानों पर रेड करके आधा दर्जन से ज्यादा भट्टियां तोड़ दी हैं।
सैकड़ों लीटर वॉश को नष्ट कर दिया है। इस धंधे में लगे कुछ लोगों को गिरफ्तार भी किया है। लेकिन, हकीकत है यह कि गांवों में अभी भी हथकढ़ बन भी रही है और बिक भी रही है। चक सामरी के लोगों का कहना है कि शिकायत पर धमकी मिलती थी, माफिया कहते हमारी ऊपर तक सैटिंग है।
पुलिस और आबकारी विभाग के डर से कारोबारियों ने सिर्फ ठिकाने बदले हैं। गांवों में 15 से 50 रुपए तक में मौत का सामान बेचा जा रहा है। कम आमदनी के चलते ज्यादातर किसान और मजदूर यह जहर खरीद लेते हैं। क्योंकि ठेका और हथकढ़ की दरों में 30 से 35 रुपए का अंतर है। भास्कर टीम शुक्रवार को उन ठिकानों तक पहुंची, जहां कच्ची शराब बन और बिक रही है। कुम्हेर कस्बे के छापर मोहल्ला, गांव साबौरा, पचौरा, तालफरा, अभौर्रा, अस्तावन, सिही, खेड़ा कारौली, भटावली, पैघोर, उसरानी में नकली और हथकढ़ कच्ची शराब का धंधा जारी है। हालांकि पुलिस ने अस्तावन, विरहरू, महरावर में 6 भट्टियां तोड़कर करीब 3000 लीटर वाश नष्ट की है। इसके बाद कारोबारियों ने ठिकाने बदल लिए हैं।
इसकी पुष्टि के लिए भास्कर ने कुछ नशेडिय़ों की मदद से कच्ची शराब भी खरीदवाई। यहां यह धंधा बंद इसलिए नहीं होता कि कच्ची शराब की बोतल यहां 60 से 80 रुपए में मिल जाती है। जबकि ठेके पर इसकी कीमत इससे डेढ़-दो गुना ज्यादा होती है। यहां कुछ लोग बाहर से रैपर, ढक्कन और खाली बोतल लाकर नकली शराब बनाकर सरकारी ठेकों की आड़ में बेच रहे हैं।
पहाड़ी क्षेत्र के जंगलों में बन रही है
इंडस्ट्रियल स्प्रिट से बनाई जा रही हथकढ़ शराब
पहाड़ी में भोजपुर और ठेका का बास के आसपास के जंगलों में अभी हथकढ़ बनाई जा रही है। धंधे से जुड़े पहाड़ी के गोरधन सिंह (बदला हुआ नाम) ने बताया कि कच्ची शराब इंडस्ट्रियल स्प्रिट से बनती है। 55 लीटर की एक केन से 220 लीटर शराब तैयार हो जाती है। इसमें 30,000 रुपए तक लागत आती है और 60,000 से ज्यादा में बिक जाती है।
शराब बनाने के लिए लोहे के ड्रम में गुड और देशी बबूल की छाल को पानी में उबाला जाता है। ड्रम के मुंह पर एक ढक्कन रखकर पानी भरते हैं और उसमें एक नली के जरिए भाप बनकर जो पानी बाहर आता है, वही कच्ची शराब होती है। इसे ज्यादा नशीली बनाने के लिए इसमें स्प्रिट मिलाई जाती है। कई बार इसका फार्मूला बिगड़ने से यह जहरीली भी हो जाती है।
सीकरी - एडवर्ड मानपुर के जंगलों में तीन भटि्टयां तोड़ी
पहाड़ी पुलिस ने दो दिन में कार्रवाई कर कुछ भट्टियां तोड़ वॉश नष्ट की थी। इसी तरह सीकरी के एडवर्ड मानपुर के जंगलों में 3 भट्टियां तोडी और 5000 लीटर वॉश नष्ट की। गांधी नगर मोहल्ले से कालू उर्फ गुरमीत को गिरफ्तार कर 5 लीटर शराब बरामद की है। उच्चैन के विलानचटपुरा में भी 300 लीटर वॉश नष्ट की और कई भट्टियां तोड़ीं। सहना से 75 पव्वे और खरका में 2 लीटर हथकढ़ बरामद की है।
कुम्हेर क्षेत्र के गांव में बिक रही है
सरपंच का भाई भी अवैध शराब के कारोबार में था शामिल : ग्रामीण
चक सामरी में जहां जहरीली शराब कांड हुआ, वहां के तो सरपंच रोहतम का एक भाई भी इस धंधे में लिप्त निकला। पिछले 2 दिन से ग्रामीण खुलकर सरपंच के भाई का नाम नहीं ले पा रहे थे। लेकिन, वे बार-बार संकेत दे रहे थे कि शिकायतों पर कार्रवाई नहीं होती। मृतक कंपोटर के भतीजे फौरन सिंह ने खुलासा किया कि गांव के ही संता उर्फ संतोष और रामेश्वर के साथ सरपंच का भाई भजनी लाल कुशवाह भी इस धंधे में लिप्त है।
यह कांड होने से पहले तक शराब बेच रहा था। इस बारे में सरपंच रोहतम ने सफाई दी है कि उसका भाई पहले अवैध शराब बेचता था। लेकिन, जब पुलिस ने कार्रवाइयां कीं तो उसने यह धंधा छोड़ दिया था। इधर, पुलिस ने चैंकोरा गांव से अवैध शराब बेचने पर उमर सिंह पुत्र ग्यारसी ठाकुर को गिरफ्तार किया है। जुरहरा पुलिस ने 9000 लीटर वॉश नष्ट कर 20 लीटर हथकड़ जब्त की है।


