महामारी प्रबंधन: लोगों को बचाने अपनाघर ने ढाई माह में तैयार किए 362 बेड के 11 वार्ड; 2 में ऑक्सीजन की भी सुविधा

महामारी प्रबंधन: लोगों को बचाने अपनाघर ने ढाई माह में तैयार किए 362 बेड के 11 वार्ड; 2 में ऑक्सीजन की भी सुविधा

पता था कि कोरोना की दूसरी लहर जरूरी आएगी। इसलिए अपनाघर आश्रम ने ढाई महीने में ही जरूरी संसाधन जुटा लिए। पिछले साल जैसे ही परिस्थितियां सामान्य होने लगीं तो सितंबर से नवंबर के बीच अपनाघर ने 362 बेड के 11 कोविड केयर वार्ड तैयार कर लिए। इनमें से दो वार्ड पॉजिटिव के लिए आरक्षित हैं। इनमें ऑक्सीजन सिस्टम के साथ 6-6 बेड हैं। जबकि 12-12 बेड के दो अन्य वार्डों में भी 4 ऑक्सीजन कंसेंटेटर भी लगाए हैं। अपनाघर में अभी कोई पॉजीटिव नहीं है।

संस्थापक डॉ. बीएम भारद्वाज ने बताया कि पिछले अनुभव को देखते हुए हमने 65, 12 और 6 बेड वाले 2-2 और 39, 11, 70, 50 एवं 26 बेड के 1-1 वार्ड बनाए हैं। यहां पाबंदियां भी सख्त हैं। वेक्सीन लगवा चुके कर्मचारियों को ही आश्रम में एंट्री है। यहां के 240 में से 35 को वेक्सीन नहीं लग पाई है। इनके साथ ही विजिटर्स के भी परिसर में जाने से रोक है। असहाय और कमजोर लोगों का रेस्क्यू जारी है। देशभर से औसतन 18 निराश्रित रोजाना यहां भर्ती होने को आ रहे हैं। इन सभी को पहले आइसोलेट फिर भर्ती किया जा रहा है।

सरकारी टेंडर प्रक्रिया को भी चुनौती 58 दिन में बनाया 65 बेड का वार्ड
अपनाघर आश्रम में काम करने की स्पीड बहुत तेज है। इसीलिए 65 बेड का वार्ड सिर्फ 58 दिन में तैयार कर दिया। सेवानिवृत अतिरिक्त जिला कलेक्टर एमपी शर्मा बताते हैं कि इतने समय में तो सरकारी टेंडर प्रक्रिया भी पूरी नहीं हो पाती। अपना घर की प्रशासनिक अधिकारी बबीता गुलाटी कहती हैं कि हमारा उद्देश्य आश्रम के प्रभुजी/आवासियों की सेवा है। इसलिए हमने जब कोरोना से लड़ने की तैयारी की तो हमारे पास काफी आर्थिक तंगी थी। लेकिन, हमने सवा करोड़ रुपए का कर्ज लिया और वार्ड खड़े कर दिए। प्रभु कृपा से इस खर्च को अब शुक्रताल और जोधपुर आश्रमों ने स्पोंसर कर दिया है।

पिछले साल 104 हुए थे पाॅजीटिव अब एक को छोड़ सभी रिकवर
अपनाघर आश्रम में पिछले साल 1440 प्रभुजी/आवासियों में से 104 पाजीटिव हुए थे। इनमें एक महिला को छोड़ सभी रिकवर हो गए हैं। क्योंकि यह महिला एचआईवी पॉजिटिव है। एक आवासी का निधन हो गया था। फिलहाल आश्रम में 3300 आवासी हैं। इनमें 1800 महिला आवासी हैं। देश के सभी 40 आश्रमों में से केवल हाथरस, दिल्ली, बस्सी, अलवर और कोटा को ही नए एडमिशन देने को कहा गया है। बाकी सभी आश्रमों को रेस्क्यू वर्क करके पीडितों को भरतपुर आश्रम में भेजने काे कहा है। बाहर से आने वाले असहाय और कमजोराें को जांच और आईसोलेशन के बाद ही भर्ती किया जा रहा है।