एक ही नंबर की दो बसें, एक ट्रैफिक पुलिस ने दूसरी मोबाइल मजिस्ट्रेट ने पकड़ी

एक ही नंबर की दो बसें, एक ट्रैफिक पुलिस ने दूसरी मोबाइल मजिस्ट्रेट ने पकड़ी

एक ही नंबर पर दो बसें चलाई जा रही थी। पहले ट्रैफिक पुलिस ने एक बस को पकड़ा। दूसरे दिन मोबाइल मजिस्ट्रेट डॉ. अजय कुमार विश्नोई ने दूसरी बस को पकड़ा तो पुलिस ने कोर्ट के ध्यान में लाया कि दोनों ही बसों के नंबर एक ही हैं। बाद में जिला परिवहन अधिकारी ने जांच की तो पहली बस नागौर में तो दूसरी बस जोधपुर में पंजीकृत मिली। दूसरी बस के तो सात साल से टैक्स भी बकाया है।

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ट्रैफिक पुलिस ने 6 जुलाई को पावटा सी रोड क्षेत्र में कार्रवाई कर नो-एंट्री एरिया में होने पर एक बस पकड़ी थी। अगले दिन 7 जुलाई को मोबाइल मजिस्ट्रेट ने जांच के दौरान एक बस को सीज किया। दोनों बसों को रातानाडा पुलिस लाइन में पार्क करवाया गया। ट्रैफिक पुलिस के ध्यान में आया कि जो बस आरजे 21 पीए 2535 सीज की है, उसी नंबर की गाड़ी मोबाइल मजिस्ट्रेट ने सीज करवाई।

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जब यह मामला मोबाइल मजिस्ट्रेट के ध्यान में लाया तो उन्होंने इस संबंध में जिला परिवहन अधिकारी से जांच करवाई। डीटीओ ने जांच में पाया कि दोनों वाहन अलग-अलग परिवहन कार्यालय में पंजीकृत हैं। वाहनों के चैसिस व इंजन नंबरों में भी भिन्नता पाई गई। वाहन संख्या आरजे 21 पीए 2535 जिला परिवहन कार्यालय नागौर में पंजीकृत है, जबकि आरजे 19 पीबी 0638 परिवहन कार्यालय जोधपुर में पंजीकृत है।

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जोधपुर में पंजीकृत वाहन ही नागौर में पंजीकृत वाहन संख्या आरजे 21 पीए 2535 के नाम से संचालित किया जा रहा था। दोनों वाहन की नंबर प्लेट एक ही पाई गई। इस वाहन की फिटनेस 22 अक्टूबर 2015 को समाप्त हो चुकी है, पीयूसी भी 1 मई 2020 को समाप्त हो चुका है।

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टैक्स भी 31 अक्टूबर 2013 तक ही जमा है। एक अनुमान के मुताबिक यह टैक्स लाखों में हो सकता है। इंश्योरेंस भी समाप्त हो चुका है। मोबाइल मजिस्ट्रेट डॉ. विश्नोई ने गाड़ी सीज मुक्त करने के लिए पेश प्रार्थना पत्र स्वीकार करते हुए नागौर में पंजीकृत वाहन को रिलीज कर दिया है।

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बसों का रंग-रूप भी एक समान, लाइट व स्टीकर ही कुछ अलग

लगातार दो दिन में पकड़ी गई इन एक ही नंबर प्लेट की बसों का रंग-रूप भी एक समान ही है। दूर से देखने पर दोनों बिलकुल एक जैसी ही दिखती हैं। इनमें कुछ अलग है तो वह एक बस में आगे अतिरिक्त हैड लाइट लगी हुई है, वहीं एक बस में कलश के साथ शुभ लाभ लिखे स्टीकर लगे हैं। एक बस में शीशे पर गांवों के नाम अंकित हैं। दोनों बसों पर भाग्य लक्ष्मी भी एक जैसा लिखा हुआ है।